खूनी बवासीर एवं कई बिमारियों में दाना मैथी से सफल इलाज:

खूनी बवासीर एवं कई बिमारियों में दाना मैथी से सफल इलाज
Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

  • खूनी बवासीर एवं कई बिमारियों में दाना मैथी से सफल इलाज:
  1. खूनी बवासीर:
    4 चम्मच मैथी को 1 गिलास पानी के साथ या दूध में उबालकर सेवन करने से बवासीर में खून आना बंद हो जाता है।
    4 चम्मच दाना मैथी और 1 गिलास पानी मिलाकर दोनों का काढ़ा बनायें। इसे रोजाना 2 बार पीने से बवासीर में खून आना बंद हो जाता है। यह खूनी पेचिश में लाभकारी है।
  2. बदन दर्द:
    2 ग्राम मैथी चूर्ण, 2 ग्राम जीरा चूर्ण गर्म दूध के साथ सेवन करने से बदन दर्द में आराम होता है।
  3. बालों की रूसी:
    नहाने के आधा घंटे के पहले मैथी को पानी में पीसकर सिर पर लेप करने से रूसी में कमी होती है। नारियल के तेल में मैथी के पिसे हुए चूर्ण को उबालकर रोजाना सिर पर मालिश करने से रूसी नष्ट होती है।
    बालों को मुलायम और चमकदार रखने के लिए मैथी को पानी में पीसकर रोजाना सिर पर लगाने से रूसी खत्म हो जाती है।
  4. आंखों के नीचे कालापन होना:
    मैथी के दानों को अच्छी तरह धो लें फिर इसको पीसकर आंखों के नीचे लेप कर लें। ऐसा करने से कालापन दूर हो जाता है।
  5. एनीमिया (खून की कमी या रक्ताल्पता):
    मैथी की सब्जी बनाकर खाने से खून साफ होता है और खून में वृद्धि होती है क्योंकि मैथी के अन्दर आयरन प्रचुर मात्रा में होता है। इसलिए एनीमिया या खून की कमी में यह बहुत उपयोगी होती है। मैथी, पालक, बथुआ आदि रोजाना सेवन करने से शरीर में खून की कमी दूर हो जाती है।
  6. कॉड लीवर ऑयल:
    मैथी को कॉड लीवर ऑयल इसलिए कहते हैं क्योंकि इसकी रासायनिक संरचना में फॉस्फेट, लेसिथिन और न्यूम्लियो एलब्युमिन पदार्थ पाये जाते हैं। कॉड लीवर ऑयल के समान गुण दाना मैथी के हलवे में मिलते हैं। दाना मैथी का हलवा बनाकर खायें और दूध पियें। यह कॉड लीवर ऑयल के समान लाभ देता है।
  7. निम्न रक्तचाप (लो ब्लड प्रेशर):
    अदरक, लहसुन, गर्म मसाला आदि डालकर बनाई गई मैथी की सब्जी खाने से निम्न रक्तचाप वाले रोगियों को लाभ मिलता है। 5 ग्राम से 20 ग्राम मैथी के बीजों का चूर्ण बनाकर गुड़ के साथ सुबह-शाम सेवन करने से शरीर में बल की वृद्धि होती है और निम्न रक्तचाप (लो ब्लड प्रेशर) सामान्य हो जाता है।
  8. एंजाइना का दर्द:
    मैथी के 1 चम्मच बीजों को डेढ़ कप पानी में उबालकर छान लें इसे दिन में 2 बार पीने से एंजाइना के रोग से छुटकारा मिलता है।
  9. मर्दाना शक्तिवर्धक:
    पिसी दाना मैथी और पिसा हुआ सूखा धनिया बराबर मात्रा में मिलाकर 2 चम्मच रोजाना रात को गर्म दूध से लें। इसे लगातार 1 से 2 महीने तक लेने से मर्दाना शक्ति बढ़ती है। मैथी सेक्स की कमजोरी को दूर करती है। मैथी के लड्डू या 1 चम्मच पिसी मैथी 2 चम्मच शहद के साथ भी ले सकते हैं।
  10. नींद का कम आना:
    दाना मैथी का एक इंच मोटा तकिया बनाकर, सिर के नीचे लगाकर सोयें। इससे गहरी नींद आयेगी।
  11. स्तनों का दूध सुखाना हो, स्तनों में सूजन, या दर्द:
    मैथी की हरी पत्तियां पीसकर लेप बना लें। इस लेप को स्तनों पर लगा करके 3 घंटे बाद धोने से स्तनों की सूजन, दर्द आदि रोग दूर होते हैं।
  12. स्तन के सौन्दर्य के लिए:
    जिन स्त्रियों के स्तन किसी कारण से छोटे रह गये हैं और वह इन्हें उभारना चाहती है तो उन्हें मैथी के दानों का सेवन करना चाहिए क्योंकि मैथी में डायस्जेनिन हार्मोन होता है जो स्तनों को विकसित करता है। स्तनों को मोटा करने के लिए दाना मैथी की सब्जी खाये या दाना मैथी में पानी डालकर पीसकर स्तनों पर मालिश करें।
  13. मासिक-धर्म में अधिक खून का आना:
    1 चम्मच दाना मैथी को एक गिलास दूध में डालकर इसे एक उबाल आने तक उबालें, फिर दूध ठंडा करके छान लें। मैथी खायें और दूध में स्वादानुसार पिसी मिश्री मिलाकर रोजाना 2 बार पीयें। इससे मासिक-धर्म में अधिक खून का आना तथा शरीर के किसी भी अंग से खून का बहना बंद हो जाता है।
  14. रजोनिवृति:
    रजोनिवृति के बाद उत्पन्न रोगों में मैथी खाने से लाभ मिलता है।
  15. शिशु-जन्म के बाद (प्रसवोपरान्त):
    शक्ति को बढ़ाने के लिए भी मैथी का प्रयोग किया जाता है। प्रसव के बाद महिलाओं का शरीर आमतौर पर शिथिल हो जाता है। मैथी फिटनेस को बनाये रखने के लिए काफी लाभदायक है। मैथी के सेवन से गर्भाशय शुद्ध होकर अपनी स्थिति में सिकुड़ जाता है। दाना मैथी के सेवन से 3 दिन में ही स्तनों में दूध बढ़ जाता है। 30 ग्राम पिसी हुई मैथी आधा किलो दूध में रात को भिगो दें। दूसरे दिन सुबह एक साफ बर्तन में 50 ग्राम घी डालकर गर्म करें और उसमें वह दूध व भीगी मैथी डालकर पकायें, बाद में उतारकर स्वादानुसार गुड़ डालकर हिलायें। हल्की गर्म रहने पर खायें। इस प्रकार 21 दिन तक खायें। इससे यदि स्तनों में दूध नहीं आता हो तो आने लगेगा, कम है तो मात्रा बढ़ जायेगी। दूध दोषमुक्त होकर शुद्ध हो जायेगा। गर्भाशय का संकोचन होगा। मैथी के लड्डू, मैथी-पाक या हलवा खाने से तंतुओं को शक्ति मिलती है और दर्द दूर होता है।
  16. पित्त विकार, सुस्ती, जी मिचलाना:
    मैथी के पत्तों के साग को घी में तलकर खाने से लाभ मिलता है।
  17. मोटापा दूर करने के लिए:
    दाना मैथी या मैथी के हरे पत्ते किसी भी रूप में सेवन करते रहने से शरीर सुडौल रहता है। मोटापा नहीं बढ़ता है और पेट पतला रहता है। छाती चौड़ी होती है और कमजोरी नहीं आती है।
  18. छाती में दर्द:
    3 चम्मच दाना मैथी को पीसकर 1 गिलास पानी में डालकर उबाल लें। उबलने के बाद जब पानी तीन-चौथाई शेष बचे तो इसे छानकर 2 चम्मच शहद मिलाकर सोते समय पीने से लाभ मिलता है।
  19. श्वेतसार (बादी बनाने वाले खाद्य पदार्थ):
    कुछ खाद्य-पदार्थ ऐसे होते हैं जिन्हें खाने से आमवात, (जोड़ों का दर्द) बढ़ता है, जैसे-आलू, चावल, भिण्डी, अरबी, फूलगोभी, उड़द की दाल, बेसन से बनी सब्जियां- कढ़ी, गट्टे आदि। इनके सेवन से होने वाले दर्द को मैथी दूर करती है। खाद्य-पदार्थों से बादी करने वाला दोष दूर करने के लिए 5 बघार (मैथीदाना, कलौंजी, जीरा, सौंफ और राई) बराबर मात्रा में मिलाकर हल्का-सा पीसकर मोटा बारीक कर लें। बादी पैदा करने वाली सब्जियों में यह 5 चीजों से बनाया `पांच बघार´ का छोंक लगायें। सब्जी में जितनी मात्रा में जीरा डाला जाता है, उतनी मात्रा में यह पंच बघार लें। इससे सब्जियों का बादीपन दूर होता है।
  20. गठिया, जोड़ों का दर्द, कमर दर्द, साइटिका:
    एक चम्मच दाना मैथी सुबह-शाम पानी से फंकी लेने से लाभ होता है। एक चम्मच दाना मैथी कूटकर, 25 ग्राम गुड़ एक गिलास पानी में उबालकर रोजाना दो बार पीने से लाभ इन विकारों में लाभ मिलता है। अंकुरित मैथी रोजाना दो बार खाने से भी लाभ होता है। गठिया, (जोड़ों के दर्द) के दूर होने के बाद यदि दिल की कमजोरी प्रतीत हो तो 1-1 चम्मच मैथी और सोंठ का चूर्ण दिन में 2 बार गुड़ में मिलाकर खाने से लाभ होता है। इसके सेवन के समय खटाई का सेवन कम-से-कम करना चाहिए।

मेथी (methi)खाने में गर्म होती है।

  • हानिकारक:

जिनकी प्रकृति गर्म हो और शरीर के किसी भी अंग से खून गिरता हो, जैसे- खूनी बवासीर, नाक से खून का गिरना(नकसीर), पेशाब में खून आना, मासिक-धर्म में अधिक खून आना और कई दिनों तक आते रहना आदि रोग हो, उन्हें तेज गर्मी के मौसम में मेथी का प्रयोग कम और सावधानी से करना चाहिए। मेथी का प्रभाव गर्म होता है। अत: इसे सर्दी के मौसम में सेवन करना अधिक लाभदायक है। मेथी अधिक मात्रा में खाने से पित्त बढ़ती है, इसलिए इसका सेवन मात्रा के अनुसार ही करना चाहिए।

अस्वीकरण

मैं अपने किसी भी हेल्थ मेसेज का 100% सही होने का दावा नहीं करता । इस टिप्स से काफी लोगों को फायदा हुआ है। कृपया आप किसी भी हेल्थ टिप्स का अपने ऊपर प्रयोग करने से पूर्व अपने वैद्यराज जी से राय लेवें ।

राजीव जैन
अध्यक्ष
बाल सेवा समिति, भीलवाड़ा

हमारे हेल्थ ग्रुप से जुड़ने के लिए हमे Whatsapp के द्वारा सूचित करें|

To join our health group, kindly notify us using WhatsApp.

0 0 vote
Article Rating

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments