स्वस्थ रहने के लिए यह करें

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हमें स्वस्थ रहने के लिए घर की निम्न चीजों में परिवर्तन करना होगा

1. नमक
2. गुड़
3. तेल
4. घी
5. दूध
6. आटा
7. पानी
8. शक्कर
9. बर्तन

नमक  कितने प्रकार होते हैं

एक होता है समुद्री नमक दूसरा होता है सेंधा नमक (rock slat)!
ये जो समुद्री नमक है आयुर्वेद के अनुसार ये तो अपने आप में ही बहुत खतरनाक है ! आज से कुछ वर्ष पहले कोई भी समुद्री नमक नहीं खाता था सब सेंधा नमक ही खाते थे। मात्र 2,3 रूपये किलो मे सब जगह मिल जाया करता था।
फिर अचानक से ऐसा क्या हुआ की लोग आओडीन युक्त समुद्री नमक खाने लगे ??

हुआ ये कि जब ग्लोबलाईजेशन के बाद बहुत सी विदेशी कंपनियों (अन्नपूर्णा,कैपटन कुक ) ने नमक बेचना शुरू किया तब ये सारा खेल शुरू हुआ। अब समझिए खेल क्या था ??
खेल ये था कि विदेशी कंपनियों को नमक बेचना है और बहुत मोटा लाभ कमाना है और लूट मचानी है तो पूरे भारत में एक नई बात फैलाई गई कि आओडीन युक्त नामक खाओ , आओडीन युक्त नमक खाओ। आप सबको आओडीन की कमी हो गई है। ये सेहत के लिए बहुत अच्छा है आदि आदि बातें पूरे देश मे प्रायोजित ढंग से फैलाई गई और जो नमक किसी जमाने मे 2 से 3 रूपये किलो में बिकता था ! उसकी जगह आओडीन नमक के नाम पर सीधा भाव पहुँच गया 8 रूपये प्रति किलो ! और आज तो 12 रूपये को भी पार कर गया है।

एक बार राजीव भाई ने किसी MP के माध्यम से संसद में सवाल पुछवाया कि पूरे देश में आओडीन की कमी से जितनी बीमारियाँ आती है जैसे घेंघा ! उसके मरीज कितने है ? पूरे देश में ! तो सरकार की तरफ से उत्तर आया कि भारत में कुल जितनी बीमारियो के कुल मरीज है उसमें से सिर्फ 0.3 % घेंघा के मरीज है ! और वो भी कहाँ है भारत मे पर्वतीय इलाके मे जहां भारत की सबसे कम आबादी रहती है। ऐसे ही राजीव भाई ने एक बार सरकार को पत्र लिखा की मुझे उन मरीजो की सूची चाहिए जिनको आओडीन की कमी से घेंगा हुआ। सूची कभी नहीं आई।
अब जो सबसे अजीब बात है वो ये कि आओडीन हर नमक में होता है बिना आओडीन का कोई नमक नहीं होता है। अब आप कहेंगे फिर इस समुद्री नमक से क्या परेशानी है ?

एक तो जैसा हमने ऊपर बताया कि आयुर्वेद के अनुसार समुद्री नमक अपने आप में ही बहुत खतरनाक है इसके अतिरिक्त कंपनियाँ इसमें अतिरिक्त आओडीन डाल रही है !! अब आओडीन भी दो तरह का होता है एक तो भगवान का बनाया हुआ जो पहले से नमक मे होता है ! दूसरा होता है industrial iodine ! ये बहुत ही खतरनाक है। तो समुद्री नमक जो पहले से ही खतरनाक है उसमें कंपनियाँ अतिरिक्त industrial iodine को डाल कर पूरे देश को बेच रही है। जिससे बहुत सी गंभीर बीमरियाँ हम लोगों को आ रही है। ये नमक मानव द्वारा फ़ैक्टरियों मे निर्मित है।

आम तौर से उपयोग मे लाये जाने वाले समुद्री नमक से उच्च रक्तचाप (highBP ) ,डाइबिटीज़,आदि गंभीर बीमारियों का भी कारण बनता है । इसका एक कारण ये है कि ये नमक अम्लीय (acidic) होता है ! जिससे रक्त अम्लता बढ़ती है और रक्त अमलता बढ़ने से ये सब 48 रोग आते है। ये नमक पानी कभी पूरी तरह नहीं घुलता हीरे (diamond ) की तरह चमकता रहता है इसी प्रकार शरीर के अंदर जाकर भी नहीं घुलता और अंत इसी प्रकार किडनी से भी नहीं निकल पाता और पथरी का भी कारण बनता है और ये नमक नपुंसकता और लकवा (paralysis ) का बहुत बड़ा कारण है। श्री राजीव बताते है कि, उन्होने कितने मरीज जो नपुंसक थे उनको समुद्री नमक छोड़ने को कहा और सेंधा नमक का प्रयोग करने को कहा मात्र 1 वर्ष मे उनकी समस्या का हल हो गया।

ऐसे ही एक बार राजीव भाई के गुरु थे जिनका नाम था प्रोफेसर धर्मपाल जी उनको एक बार लकवे (paralysis) का अटैक आ गया । उनकी आवाज तक चली गई और हाथ पैर एक जगह रुक गए उनके बाकी शिष्य धर्मपाल जी को अस्पताल ले गए वहाँ डाक्टरों से भी कुछ नहीं हुआ तो डाक्टरों उनके हाथ पैर बांध दिये। राजीव भाई को जैसे ही खबर मिली राजीव वहाँ पहुंचे और उनको वहाँ से उठा कर घर ले आए और उनकी दो होमेओपेथी दवाइयाँ देना शुरू की ! मात्र 3 दिन में उनकी आवाज वापिस आ गई ! और एक सप्ताह बाद वो ऐसे दिखने लगे कि मानो कभी अटैक ही ना आया हो।

तो राजीव भाई बताते है कि मैंने होमेओपेथी में उस दवा को दिया जो सेंधा नमक ना खाने से शरीर मे आने वाली कमियों को पूरा करती है । इसकी जगह अगर सेंधा नमक वाला भी पिलाता तो वो ठीक हो जाते लेकिन उनकी हालत ऐसे थी की मात्र दवा की बूंद ही अंदर जा सकती थी तो राजीव भाई ने वो पिलाया और धर्मपाल जी ठीक हुये।

कुल मिलकर कहने का अर्थ यही है कि आप इस अतिरिक्त आओडीन युक्त समुद्री नमक खाना छोड़िए और उसकी जगह सेंधा नमक खाइये । सिर्फ आयोडीन के चक्कर में समुद्री नमक खाना समझदारी नहीं है, क्योंकि जैसा हमने ऊपर बताया आओडीन हर नमक मे होता है सेंधा नमक मे भी आओडीन होता है बस फर्क इतना है इस सेंधा नमक में प्राकृतिक के द्वारा भगवान द्वारा बनाया आओडीन होता है इसके इलावा आओडीन हमें आलू, अरवी के साथ-साथ हरी सब्जियों से भी मिल जाता है।

सेंधा नमक के उपयोग से रक्तचाप और बहुत ही गंभीर बीमारियों पर नियन्त्रण रहता है। क्योंकि ये अम्लीय नहीं ये क्षारीय है (alkaline ) क्षारीय चीज जब अमल मे मिलती है तो वो न्यूटल हो जाता है और रक्त अमलता खत्म होते ही शरीर के 48 रोग ठीक हो जाते हैं। ये नामक शरीर मे पूरी तरह से घुलनशील है। और सेंधा नमक की शुद्धता के कारण आप एक और बात से पहचान सकते हैं कि उपवास ,व्रत मे सब सेंधा नमक ही खाते है। तो आप सोचिए जो समुंदरी नमक आपके उपवास को अपवित्र कर सकता है वो आपके शरीर के लिए कैसे लाभकारी हो सकता है ?

इसके अतिरिक्त सेंधा नमक शरीर मे 97 पोषक तत्वों की कमी को पूरा करता है। इन पोषक तत्वों की कमी ना पूरी होने के कारण ही लकवे (paralysis ) का अटैक आने का सबसे बड़ा जोखिम होता है। जबकि समुद्री नमक से सिर्फ शरीर को 4 पोषक तत्व मिलते है। और बीमारियाँ जरूर साथ मे मिल जाती है।

राजीव भाई तो यहाँ तक कहते है कि, अगर आपके 2 बच्चे है तो एक बच्चे को 11 साल तक समुद्री नमक पर पाल के देखो और दूसरे को सेंधा नमक पर उनके शारीरिक और मानसिक परिवर्तन देख आपको खुद पर खुद अंदाजा हो जाएगा कि, ये समुद्री नमक कितना हानिकारक है और सेंधा कितना फायदेमंद।

दुनिया के 56 देशों ने अतिरिक्त आओडीन युक्त नमक 40 साल पहले बेन कर दिया अमेरिका में नहीं है जर्मनी में नहीं है फ्रांस में नहीं ,डेन्मार्क में नहीं , यही बेचा जा रहा है डेन्मार्क की सरकार ने 1956 मे आओडीन युक्त नमक बैन कर दिया क्यों ? उनकी सरकार ने कहा हमने आओडीन युक्त नमक खिलाया । (1940 से 1956 तक ) अधिकांश लोग नपुंसक हो गए । जनसंख्या इतनी कम हो गई कि देश के खत्म होने का खतरा हो गया । उनके वैज्ञानिकों ने कहा कि आओडीन युक्त नमक बंद करवाओ तो उन्होने बैन लगाया और शुरू के दिनो मे जब हमारे देश में ये आओडीन का खेल शुरू हुआ इस देश के बेशर्म नेताओं ने कानून बना दिया कि बिना आओडीन युक्त नमक बिक नहीं सकता भारत में वो कुछ समय पूर्व किसी ने कोर्ट में मुकदमा दाखिल किया और ये बैन हटाया गया।
अंत में आपके मन में एक और सवाल आ सकता है कि, ये सेंधा नमक बनता कैसे है ?

तो उत्तर ये है कि सेंधा नमक बनता नहीं है पहले से ही बना बनाया है । पूरे उत्तर भारतीय उपमहाद्वीप में खनिज पत्थर के नमक को ‘सेंधा नमक’ या ‘सैन्धव नमक’ ,लाहोरी नमक आदि आदि नाम से जाना जाता है ! जिसका मतलब है ‘सिंध या सिन्धु के इलाक़े से आया हुआ’। वहाँ नमक के बड़े बड़े पहाड़ है सुरंगे है । वहाँ से ये नमक आता है । मोटे मोटे टुकड़ो में होता है आजकल पीसा हुआ भी आने लगा है यह ह्रदय के लिये उत्तम, दीपन और पाचन मे मददरूप, त्रिदोष शामक, शीतवीर्य अर्थात ठंडी तासीर वाला, पचने में हल्का है । इससे पाचक रस बढ़ते हैं। तो अंत आप ये समुद्री नमक के चक्कर से बाहर निकले। काला नमक ,सेंधा नमक प्रयोग करे । क्यूंकि ये प्रकर्ति का बनाया है ईश्वर का बनाया हुआ है और सदैव याद रखे इंसान जरूर शैतान हो सकता है लेकिन भगवान कभी शैतान नहीं होता ।

अस्वीकरण

मैं अपने किसी भी हेल्थ मेसेज का 100% सही होने का दावा नहीं करता । इस टिप्स से काफी लोगों को फायदा हुआ है। कृपया आप किसी भी हेल्थ टिप्स का अपने ऊपर प्रयोग करने से पूर्व अपने वैद्यराज जी से राय लेवें ।

राजीव जैन
अध्यक्ष
बाल सेवा समिति, भीलवाड़ा

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