Leukorrhea (श्वेत प्रदर) and Metrorrhagia (रक्त प्रदर)

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  • गेहूँ का सेवन 6 माह के लिए बंद कर दें ।
  • सिंघाड़े का आटा 33%, जौ का आटा 33%,बाजरे का आटा 33%, मिलाकर रोटी बनाकर खाएँ ।
  • चाय,तेज मिर्च,अचार, बेसन,चावल का उपयोग 45 दिन नहीं करें ।
  • शीशम् पत्तों का पाउडर 25 ग्राम + सिंगाड़े का आटा 100 ग्राम मिलाकर
    गाय के घी में हलवा बनाऐं, शक्कर की जगह डोरा मिश्री डालें, निरन्तर 20 दिन तक प्रातः काल के भोजन के साथ लें ।
  • सहजने की हरी पत्ती सभी सब्जी व दालों में 25 ग्राम डालें ।
  • गुड़हल के 2 पुष्प 3-3 घंटे के अंतराल में 10 दिन तक खाएँ।
  • बकरी के दूध का 200 ग्राम दही लेकर छाछ बनाकर उसमें एक नींबू निचौड़कर पी जाएँ , प्रातः सायं 10 दिन तक 200-200 ग्राम दही व एक नींबू ।
  • सीता अशोक पेड़ के 5 पत्ते या 25 ग्राम छाल का प्रतिदिन काढा बनाकर रात्रि भोजन के 2 घण्टे बाद सेवन करें ।
  • नीम गिलोय 6 इन्च की डन्डी + 5 ग्राम सौंफ + 5 ग्राम तुरन्त कूटी हुई हल्दी + 20 ग्राम सहजन की पत्तियाँ + 5 पत्ते गुलर + 25 ग्राम हरी दूब
    इन सभी को जूस बनाकर रोगी सुबह शाम सेवन करें ।
  • सूती कपड़े पहनें
  • साफ सफाई का पूरा ध्यान रखें ।
  • तेज धूप में जाने से बचें
  • ज्यादा शारीरिक श्रम ना करें
  • बाजार के नमक की जगह सेंधा व काला नमक मिलाकर काम लें ।
  • शक्कर की जगह डोरा मिश्री का उपयोग करें । इलाज की अवधि में पती पत्नी दूर रहें

Leukorrhea and Metrorrhagi

अस्वीकरण

मैं अपने किसी भी हेल्थ मेसेज का 100% सही होने का दावा नहीं करता । इस टिप्स से काफी लोगों को फायदा हुआ है। कृपया आप किसी भी हेल्थ टिप्स का अपने ऊपर प्रयोग करने से पूर्व अपने वैद्यराज जी से राय लेवें ।

राजीव जैन
अध्यक्ष
बाल सेवा समिति, भीलवाड़ा

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